Wednesday, August 25, 2010

गजलें - 6

गोद में बच्चा लिए कोई ब्याहता 
हो खड़ी जैसे मुजस्सम भव्यता |
मैंने तो बस इसलिए चाहा तुझे  
कौन मेरी तरह तुझको चाहता  |
कितने खुशकिस्मत हैं जो कह सकते हैं
माँ! बनाओ हलवा, पूडी, रायता |
थे तो बैठे खोल के दफ़्तर सभी,
 कौन भिखमंगों से जाकर मांगता |
हम तो लड़ने के लिए तैयार हैं 
पर हमें मालूम तो हो मुद्दाआ |

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