गोद में बच्चा लिए कोई ब्याहता
हो खड़ी जैसे मुजस्सम भव्यता |
मैंने तो बस इसलिए चाहा तुझे
कौन मेरी तरह तुझको चाहता |
कितने खुशकिस्मत हैं जो कह सकते हैं
माँ! बनाओ हलवा, पूडी, रायता |
थे तो बैठे खोल के दफ़्तर सभी,
कौन भिखमंगों से जाकर मांगता |
हम तो लड़ने के लिए तैयार हैं
पर हमें मालूम तो हो मुद्दाआ |
No comments:
Post a Comment