शब्द में घर कर रही चुप्पी को टोना चाहिए
क्रांतिधर्मी काव्य में भी मौन होना चाहिए .
शायरी में ज़िन्दगी और ज़िन्दगी में शायरी
भावना की आंच, भाषा का भगौना चाहिए .
उनकी कोशिश है की थोड़ा शोर , थोड़े नारे बस
अपनी कोशिश है की हंगामा भी होना चाहिए .
घर बसाने के लिए धरती भले ही कम पड़े
दिल बसाने के लिए बस एक कोना चाहिए .
हैं तो हैं रिश्ते , नहीं हैं तो नहीं हैं, और क्या
इनके चलते चैन अपना थोड़े खोना चाहिए .
सब तो हो जाता है आड़े-तिरछे , आगे-पीछे पर
हो नहीं पता है बस वो ही जो होना चाहिए .
ग़ैर के पावों से चल के मंजिलें मिलतीं नहीं
अपना सपना अपने ही कन्धों पे ढोना चाहिए .
०२.०९.2010
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